भारत सारे विश्व में एकमात्र ऐसी जगह है जहां मैं सह अस्तित्व की भावना देखने को मिलती है और उस भावना को प्रैक्टिकल सामने अनुभव किया।
यह कहना है जापान से आई हुई अंतरराष्ट्रीय पिआनो कलाकर साओमी तकोनो का सओमि यूरोपियन क्लासिकल म्यूजिक की अंतर्राष्ट्रीय कलाकार है वह पूरे विश्व में अपने कार्यक्रमों से लोगों का दिल जीत रही हैं। पंडित जगन्नाथ राव महाजन की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय लय यात्रा के आज के कार्यक्रम में वह तबला कलाकार तानसेन श्रीवास्तव के साथ स्थानीय हरदिया साहू समाज में अपनी प्रस्तुति देने वाली है प्रखर समाचार ने उनसे बातचीत की प्रस्तुत है उसके कुछ अंश साओमी कहती है कि वह जापान की रहने वाली है जब उनसे पूछा गया कि जापान और भारत में उन्होंने प्रमुख अंतर क्या देखा तो उनका कहना था कि जापान के लोग काफी शर्मीले होते हैं जबकि भारत में लोग बेझिझक अपनी बात कह देते हैं और आध्यात्मिक स्तर पर दोनों ही देश की मान्यताएं व मानसिकताएं तकरीबन एक सी है जब उनसे पूछा गया कि वह भारतीय संगीत को किस तरह देखती है तो उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत आध्यात्म का ही एक हिस्सा है और भारतीय संगीत पूरी तरह से कलाकार की सोच और उसके स्वभाव पर निर्भर करता है,कि वह किस तरह किसी राग को बरतता है । वही यूरोपियन म्यूजिक स्क्रिप्टेड होता है वहां जो बड़े-बड़े संगीतकार हुए हैं उनकी रचनाओं को जस का तस बजाने का रिवाज है जबकि भारतीय संगीत में केवल गत या बंदिश पुरानी होती है जबकि इसका ट्रीटमेंट पूरी तरह से आर्टिस्ट अपने हिसाब से करता है वह आज के कार्यक्रम को लेकर बेहद उत्साहित है और उन्होंने धमतरी के सुधी श्रोताओं से अपील की है कि वह आज शाम 6:00 बजे स्थानीय हरदिया साहू समाज में उपस्थित होकर कार्यक्रम का आनंद लें।

