गीता पाठ, हवन यज्ञ , भंडारा के साथ भागवत का समापन
मुकेश कश्यप की रिपोर्टकुरूद . श्री नर्मदेश्वर महादेव परिवार कुरूद द्वारा वृंदावन सरोवर में जारी श्री मदभागवत कथा के अंतिम दिवस गीता पाठ , हवन यज्ञ, पूर्णाहुति और भंडारा प्रसादी के साथ भागवत का समापन हुआ।व्यासपीठ से कथावाचक श्री नागेश्वर दुबे जी ने गीता पाठ कर इसका सार सुनाया। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत महापुराण के अंतिम दिन गीता पाठ, हवन और यज्ञ का विशेष धार्मिक महत्व है। यह आयोजन कथा के मंगलमय समापन और पूर्णाहुति का प्रतीक होता है।श्री दुबे ने बताया कि समापन दिवस पर गीता के महत्वपूर्ण अध्यायों का पाठ किया जाता है जो कि जीवन का सार और ईश्वर की शरणागति सिखाते हैं। उन्होंने बताया पवित्र धार्मिक गीता का पाठ श्री हरि से हमें जोड़ता है और उनके विचारों का जीवन मे आत्मसात करना सिखाता है। उसका प्रत्येक अध्याय ज्ञान का भंडार और मोक्ष का द्वार है। इसके उपरांत विधिविधान के साथ हवन यज्ञ की शुरुआत हुई। और स्वाहा स्वाहा की मधुर गूंज के साथ यज्ञ भगवान की आराधना कर पूर्ण आहुति दी गई। श्री दुबे जी ने बताया कि श्री भागवत कथा के ज्ञानार्जन के बाद, हवन के माध्यम से 'पूर्णाहुति' की जाती है, जो अग्नि के माध्यम से परमात्मा को आहुति अर्पित करने और वातावरण को शुद्ध करने का अनुष्ठान है।यह अनुष्ठान आत्मज्ञान, मोक्ष और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।इसके उपरांत विधिविधान पूर्वक गौ माता को भोग लगाया गया और श्री हरि की आरती वंदना की गई।इसके पश्चात गौ माता की महिमा का वर्णन भजन के माध्यम से किया गया।अंतिम चरण में महराज जी ने इस सम्पूर्ण आयोजन में पधारे भक्तों का आभार जताते हुए आयोजन समिति को इस बेहतरीन व्यवस्था बनाए रखने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। विदाई भजन के दौरान कथा स्थल पर सभी भाउक हो गए।इसके साथ ही भंडारा प्रसादी वितरण प्रारंभ हुआ और समिति के सदस्यों सहित विभिन्न स्थानों से पधारें भक्तों ने सेवा कार्य कर अपनी आस्था प्रकट की।इस सम्पूर्ण आयोजन को सफल बनाने में श्री नर्मदेश्वर महादेव परिवार के सदस्यों सहित भक्त गणों का विशेष योगदान रहा।
रिपोर्ट@मुकेश कश्यप







