सुदामा चरित्र की कथा ने किया भाव विभोर, प्रभु की कृपा से हुआ जीवन का उद्धार
मुकेश कश्यप की रिपोर्ट
कुरूद . कुरूद में जारी श्रीमद भागवत कथा के सप्तम दिवस मंगलवार को भगवान का अन्य विवाह, सुदामा चरित्र की कथा सुनाई गई। व्यास पीठ से पं. श्री नागेश्वर प्रसाद दुबे जी ने कहा कि सुदामा चरित्र की कथा सच्ची मित्रता के महत्व को दर्शाती है।प्रभु की कृपा से उनके जीवन का उद्धार हुआ और अपने दीनदयाल रूप से श्री कृष्ण जी ने अपनी कृपा बरसाई।आज के आधुनिक समय में टूटते बिखरते रिश्तों को बचाने के लिए सुदामा चरित्र की कथा सार्थक है।जिससे हम अपने मित्रों के प्रति समर्पित और कर्तव्य निष्ठ बनकर अपने जीवन मूल्यों को बढ़ा सकते है।इस महीने की प्रथम तारीख से प्रारंभ हुई इस पावन पुनीत कथा के अंतिम दिवसों में भक्तों की आस्था देखी जा रही है। श्री नर्मदेश्वर सेवा समिति द्वारा आयोजित इस ऐतिहासिक श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ में मंगलवार को श्री दुबे जी ने बताया कि सुदामा चरित्र निस्वार्थ मित्रता और अटूट भक्ति का प्रतीक है।उन्होंने बताया कि दरिद्र ब्राह्मण सुदामा ने अपनी पत्नी के आग्रह पर द्वारकाधीश कृष्ण से मिलने की यात्रा की, जहाँ कृष्ण ने अपने मित्र का भव्य स्वागत किया, उनके चरण धोए और बिना मांगे ही उनकी दरिद्रता दूर कर दी, जो ईश्वर की भक्त-वत्सलता को दर्शाता है। यह प्रसंग सिखाता है कि ईश्वर केवल प्रेम और निस्वार्थ भक्ति के भूखे होते हैं। इस दौरान नन्हे मुन्हे बच्चों ने श्री कृष्ण और सुदामा का रूप धारण कर सबका मन मोहा। मधुर भजन और संगीत की अविरल धारा में भक्तों ने अपनी आस्था प्रकट करते हुए भागवत कथा के इस गंगा में डुबकी लगाई।इसके उपरांत आरती पूजन पश्चात प्रसादी वितरण कर श्री हरि के सम्मुख जनकल्याण की अर्जी लगाई गई।महराज जी ने बताया कि अब कथा के अष्टम दिवस को यदुकुल को श्राप, परिक्षित मोक्ष, तुलसी वर्षा, शोभायात्रा,और अंतिम दिन को गीता पाठ, यज्ञ -हवन, पूर्णाहुति, कथा विश्राम होगा।
मुकेश कश्यप की रिपोर्ट











