मिट्टी शिल्प का प्रशिक्षण बना आकर्षण का केंद्र ,पारंपरिक कला से जुड़े नन्हे-मुन्हे
कुरूद. दुनिया कितनी भी बदल जाए अपनी परंपराओं और विरासत को सहेजना कभी नही भूलती है। इन्ही विचारों पर अमल करते हुए कलीराम चंद्राकर पब्लिक स्कूल कुरूद में जारी समर कैंप के चौथे दिन मिट्टी शिल्प कला से बच्चों को रूबरू कराया गया।सोमवार को विधिवत पूजा अर्चना उपरांत प्रथम चरण में योगा और मेडिटेशन से बच्चों को जोड़ा गया। स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए योगाभ्यास सत्र आयोजित किए गए। इसमें बच्चों को प्राणायाम, सूर्य नमस्कार और एकाग्रता बढ़ाने वाले विभिन्न आसनों का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने बच्चों को दैनिक जीवन में योग के महत्व से अवगत कराया। तदउपरांत नृत्य कला को पारंपरिक और नवीन पद्धतियों से जोडकर उसके प्रत्येक स्वरूप की बारीकियां सिखाई गई।मधुर मुस्कान और चंचलता के साथ बच्चों ने अपनी लगनशीलता से मनभावन बना दिया।ताल रिदम बीट सभी आकर्षक रूप में सबका ध्यान आकर्षित करने लगे।भोजन अवकाश उपरांत बच्चों को पारंपरिक मिट्टी शिल्प की कला सिखाई गई। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में नन्हे हाथों ने मिट्टी से आकर्षक खिलौने, दीये और कलाकृतियां बनाना सीखा। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्वदेशी कला और रचनात्मकता से जोड़ना रहा।अंतिम चरण में सांस्कृतिक गतिविधियों के अंतर्गत बच्चों को शास्त्रीय एवं सुगम संगीत की बारीकियां सिखाई गईं। इस कार्यशाला में बच्चों ने विभिन्न लोक और आधुनिक संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया। सुर और ताल के इस संगम ने शिविर में ऊर्जा भर दी।प्राचार्य के मंजीता ठाकुर ने बताया कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचानने का अवसर मिलता है। शिविर के समापन पर बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसकी अभिभावकों ने काफी सराहना की।ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वदेशी कला और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करना है।इस दौरान शिक्षक-शिक्षिकाओं की अग्रिम भूमिका अपना योगदान दे रही है।
