परिक्षित मोक्ष और तुलसी वर्षा उपरांत निकली भव्य शोभायात्रा,उमड़ी आस्था

परिक्षित मोक्ष और तुलसी वर्षा उपरांत निकली भव्य शोभायात्रा,उमड़ी आस्था 


मुकेश कश्यप की रिपोर्ट
कुरूद . व्यास पीठ से पं. श्री नागेश्वर प्रसाद दुबे जी ने कथा के आठवें दिन यदुकुल को श्राप, परिक्षित मोक्ष, तुलसी वर्षा की कथा सुनाई इसके उपरांत भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्री दुबे जी ने बताया कि यदुकुल को श्राप, राजा परीक्षित को मोक्ष और तुलसी वर्षा श्रीमद भागवत पुराण की अत्यंत महत्वपूर्ण और गूढ़ कथाएं हैं, जो भगवान कृष्ण की लीलाओं और नियति के अटूट चक्र को दर्शाती हैं। कुरूद वृंदावन सरोवर में जारी कथा के तहत बुधवार को उमड़ी भारी भीड़ के बीच वर्णित कथा में श्री दुबे जी ने कहा कि यह कथा श्री कृष्ण जी की महिमा को दर्शाती है। जिसके प्रभाव से जीवन में त्याग , समर्पण और सेवा भक्ति की भावना निर्मित होती है।श्री हरि जी ने अपनी कृपा से जगत का कल्याण किया और लोगो का उद्धार किया। इसके उपरांत तुलसी कथा सुनाई गई जिसके अनुसार भगवान विष्णु की भक्ति से जुड़ी कथा है। देवी वृंदा ने भगवान विष्णु की परम भक्त होने के कारण ही तुलसी का रूप धारण किया।शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति भगवान कृष्ण को तुलसी दल अर्पित करता है, उसे विशेष पुण्य प्राप्त होता है।भागवत कथा और कृष्ण भक्ति में तुलसी की वर्षा को मोक्ष का कारण माना गया है। यदुकुल को श्राप ने कृष्ण की पृथ्वी से विदाई की पृष्ठभूमि तैयार की, जबकि परीक्षित को श्राप ने भागवत कथा के माध्यम से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया। तुलसी भक्ति और शुद्धि की प्रतीक हैं। अंतिम चरण में डीजे की मधुर थाप में भक्ति गीतों से सजी भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जो कि कथा स्थल से नया बाजार , थाना चौक होते हुए चंडी मंदिर पहुंची । विधिवत पूजा अर्चना उपरांत यह शोभायात्रा पुनः कथा स्थल तक पहुंची।इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ ने श्री हरि और भागवत पुराण को सिर पर नवाकर अपनी श्रद्धा प्रकट की। कथा के अंतिम दिन  गीता पाठ, यज्ञ -हवन, पूर्णाहुति, कथा विश्राम होगा।






           




         
                                     रिपोर्ट मुकेश कश्यप