बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रही गैस, ब्लैक में बिक रहे सिलेंडर — उपभोक्ता बेहाल, सिस्टम पर सवाल

लखनऊ में रसोई गैस संकट अब सिर्फ सप्लाई की समस्या नहीं रहा, बल्कि ब्लैक मार्केटिंग, डिलेवरी घोटाले और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। राजधानी के कई इलाकों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि गैस बुक करने के बावजूद सिलेंडर घर तक नहीं पहुंच रहा, जबकि सिस्टम में डिलीवरी दिखाकर उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा है।

भारत गैस से जुड़े अशोक गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं।उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस बुक करने के बाद सिर्फ डिलीवरी मैसेज भेज दिया जाता हैवास्तविक सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचताए और एजेंसी कर्मी फोन उठाना बंद कर देते हैं उपभोक्ताओं को बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वहीं लखनऊ के कई क्षेत्रों में लोगों ने बताया कि उन्हें DAC (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) मिल जाता है, लेकिन सिलेंडर कई दिनों तक नहीं आता, जिससे रसोई ठप हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घरेलू गैस सिलेंडर आम उपभोक्ताओं को नहीं बल्कि होटल और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं को तीन से चार हजार रुपये तक ब्लैक में बेचे जा रहे हैं

          हालिया पुलिस कार्रवाई में भी लखनऊ में डिलीवरी बॉय को सब्सिडी सिलेंडर ₹3000 में बेचते पकड़ा गया, जिससे संगठित नेटवर्क की आशंका मजबूत हुई है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि शहर में घरेलू गैस की कमी के बीच अंडरग्राउंड ब्लैक मार्केट सक्रिय हो चुका है और सिलेंडर दोगुने दाम पर बिक रहे हैं। 

विभाग कार्रवाई का दावा तो कर रहा है लेकिन ज़मीन पर असर कहीँ दिखाई नहीं दे रहा है। सरकार और प्रशासन के अनुसार अब तक1 483 स्थानों पर जांच की गई है जिनमें 24 FIR दर्ज हुई और कुछ गिरफ्तारियों का भी दावा प्रशासन ने किया है। लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी स्तर पर गड़बड़ी अब भी जारी है और स्थानीय स्तर पर इंस्पेक्टर या क्षेत्राधिकारी की कार्रवाई दिखाई नहीं देती। 

       गैस संकट से छोटे कारोबार ठप पड़ गए हैंगै स की कमी का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है चाट, चाय और फास्ट-फूड दुकानदारों का काम बंद हो गया है जिससे कई मजदूर गांव लौटने को मजबूर हो गए हैं। लखनऊ में कई दुकानदारों ने बताया कि 10 दिन तक गैस न मिलने से रोज़गार ठप हो गया। 

अब सवाल उठता है कि जब सिस्टम में गैस डिलीवर दिख रही है, तो सिलेंडर गया कहाँ? एजेंसी स्तर पर सिलेंडर डायवर्जन हो रहा है? क्या घरेलू गैस होटल नेटवर्क में जा रही है? आखिर क्यो नहीं हो रही सख्त स्थानीय कार्रवाई?लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो गैस संकट बड़ा जनआक्रोश बन सकता है।कुल मिलाकर लखनऊ में गैस संकट अब सप्लाई समस्या से ज्यादा सिस्टम की पारदर्शिता की परीक्षा बन चुका है। 

स्वाति वर्मा

ब्यूरो लखनऊ