रायपुर - छत्तीसगढ़ की कला का राष्ट्रीय मंच पर गौरव : सूरजकुंड महोत्सव में मनुराज-उपासना की ऐतिहासिक प्रस्तुति
हरियाणा के फरीदाबाद स्थित विश्वप्रसिद्ध सूरजकुंड परिसर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प एवं कला महोत्सव 2026 में छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का ऐसा परचम लहराया कि पूरे आयोजन में उनकी प्रस्तुति चर्चा का केंद्र बन गई।
नगर के सुप्रसिद्ध तबला वादक पंडित मनुराज पचौरी और कथक नृत्यांगना उपासना भास्कर ने अपनी संयुक्त प्रस्तुति से न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि वे इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति देने वाले छत्तीसगढ़ के पहले कलाकार बनने का ऐतिहासिक गौरव भी हासिल कर गए। उनकी प्रस्तुति को अविस्मरणीय बनाने में जिस कलाकार का बड़ा हाथ रहा उनका नाम था पंडित सुरेश दुबे। सुरेश दुबे भजन व ठुमरी गायन का अंतरराष्ट्रीय ख्यात नाम है वे करीब 58 देश में अपने गायन से लोगों को अभिभूत कर चुके हैं । इस तरह छत्तीसगढ़ के इन तीनों कलाकारों ने इस विश्व स्तरीय मंच पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
यह भव्य मेला 31 जनवरी से 15 फरवरी तक आयोजित हुआ, जिसमें दुनिया के लगभग 28 देशों के कलाकार, शिल्पकार और सांस्कृतिक प्रतिनिधि शामिल हुए। विभिन्न देशों की लोक परंपराएँ, संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प प्रदर्शित किए गए।
इन्हीं अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों के बीच मनुराज-उपासना की जुगलबंदी ने भारतीय शास्त्रीय कला की गरिमा को नए शिखर पर पहुँचाया।
तबला–कथक की अद्भुत जुगलबंदी
मनुराज पचौरी के दमदार, जटिल लयकारी से भरपूर तबला वादन ने श्रोताओं को रोमांचित कर दिया।
वहीं उपासना भास्कर की भावपूर्ण कथक प्रस्तुति, तीव्र पद संचालन और नज़ाकत भरे अभिनय ने मंच को जीवंत बना दिया।
दोनों की ताल-लय की समन्वित प्रस्तुति पर दर्शकों ने लगातार तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।
इस प्रस्तुति में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायक पंडित सुरेश दुबे ने अपने गायन से कार्यक्रम और भी भव्य एवं प्रभावशाली बना दिया।
यह उपलब्धि केवल इन कलाकारों की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की बड़ी सफलता मानी जा रही है।इन कलाकारों की इस मंच तक की यात्रा में युवा भाजपा नेता व उच्च न्यायलाय के वकील राहुल इंदर चोपड़ा का विशेष योगदान रहा।
कला जगत के जानकारों के अनुसार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस स्तर की प्रस्तुति देना किसी भी कलाकार के लिए अत्यंत गौरव की बात है, और पहली बार छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व होना ऐतिहासिक उपलब्धि है।
इस प्रस्तुति ने यह सिद्ध किया कि छत्तीसगढ़ की शास्त्रीय कला परंपरा अब राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त पहचान बना रही है।
इन कलाकारों की इस उपलब्धि पर पूर्व विधायक इंदर चोपड़ा, हर्षद मेहता, मदनमोहन खंडेलवाल,पी बी पराडकर,महापौर रामू रोहरा, कविंद्र जैन, वीरेंद्र साहू,खिलेंद्र साहू, राजकुमार महावर, रणजीत छाबडा, विशेष लखोटीया, अरुण चौधरी,मुकेश जैन,विजय साहू,लक्ष्मीकांत गजेंद्र, अमन गिरी गोस्वामी, आदि ने बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

