दुर्ग/छत्तीसगढ़। अनुशासन के नाम पर कथित क्रूरता का मामला सामने आया है। दुर्ग जिले के एक जवाहर नवोदय विद्यालय (बोर्डिंग) में मोबाइल रखने की बात पर 8 से 9 छात्रों की शिक्षकों द्वारा जमकर पिटाई किए जाने का आरोप है। पीड़ित छात्रों में कक्षा 10वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी शामिल बताए जा रहे हैं। परिजनों का दावा है कि मारपीट इतनी गंभीर थी कि कुछ बच्चों को आंख और कान में अंदरूनी चोटें आईं, वहीं एक छात्र के निजी अंग पर लात मारने का भी आरोप लगा है।
घटना के बाद एक छात्र के पिता ने पुलगांव थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपों को प्रथमदृष्टया गंभीर मानते हुए संबंधित शिक्षकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी है और मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, बोर्डिंग परिसर में मोबाइल रखने पर रोक को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि इसी बात पर शिक्षकों ने समूह में छात्रों की पिटाई की। घटना की तस्वीरें और चोटों के संकेत सोशल मीडिया पर भी सामने आए हैं, जिससे अभिभावकों में आक्रोश है।
कानूनी पहलू:
बाल संरक्षण कानूनों और स्कूलों में शारीरिक दंड पर रोक के स्पष्ट प्रावधान हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधितों पर कठोर कार्रवाई संभव है। शिक्षा विभाग भी मामले पर रिपोर्ट तलब कर सकता है।
प्रशासन की कार्रवाई:
पुलिस ने कहा है कि निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारी आंतरिक जांच की तैयारी में हैं। स्कूल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक बयान आना बाकी है।
बड़ा सवाल:
क्या अनुशासन लागू करने के नाम पर बच्चों के साथ हिंसा जायज है?


