श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं ने किया मोहित , गोवर्धन पूजा और रूखमणी विवाह कथा में उमड़ी आस्था
मुकेश कश्यप की रिपोर्ट
कुरूद . नगर के वार्ड क्रमांक सात स्थित श्री नर्मदेश्वर सेवा समिति द्वारा श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। कथा के छटवे दिवस सोमवार को श्री कृष्ण बाल लीला , गोवर्धन पूजा और रूखमणी विवाह की कथा का वर्णन हुआ। प्रतिदिन की भांति विधिवत पूजा वंदना उपरांत कथा प्रारंभ हुई। व्यास पीठ पर विराजमान पं. श्री नागेश्वर प्रसाद दुबे जी के श्रीमुख से कृष्ण बाल लीला , गोवर्धन पूजा और रूखमणी विवाह की कथा का वर्णन हुआ जिसमें कृष्ण जी के बाल रूप का मनमोहक वर्णन करने के साथ-साथ उनके ब्रजवासियों के प्रति समर्पण और सेवा का वर्णन हुआ l श्री दुबे जी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं भक्ति और ज्ञान का अद्भुत संगम हैं, जिसमें बाल लीला जिसमें माखन चोर के रूप में श्री कृष्ण जी का बाल चरित्र है।नंदलाला जी किस तरह बचपन में नटखट थे,उनका स्वरूप काफी मोहित करने वाला होता है। इसी तरह गोवर्धन पूजा की कथा में भगवान श्रीकृष्ण जी का इंद्र के अहंकार तोड़ कर बृजवासियों को तारने का वर्णन है। कृष्ण जी ने अपनी लीलाओं से तो सबका मन मोहा था, अब उन्होंने अपनी अटूट लीला से गोवर्धन पर्वत द्वारा लोगों को बचाया। इसके उपरांत रूखमणी विवाह का वर्णन हुआ। जिसमे प्रेम और समर्पण का विशेष वर्णन देखने को मिला।स्थानीय बच्चों ने इसका रूप धारण कर सबको मोहित कर दिया।सभी ने विधिवत पारंपरिक रूप से विवाह की रस्मों को पूर्ण किया।इस दौरान सभी ने स्वेच्छानुसार दान कर अपनी आस्था प्रकट की।सोमवार को वर्णित कथाओं के माध्यम से श्री दुबे जी ने बताया कि ये प्रसंग भक्तों को अहंकार त्यागने, प्रकृति संरक्षण और ईश्वर में पूर्ण विश्वास रखने की शिक्षा देते हैं, जो भागवत कथाओं में वर्णित हैं। कृष्ण बाल रूप में गोपियों के घरों से माखन चुराते थे, जो अहंकार को नष्ट करने और भक्त के मन को चुराने का प्रतीक है।श्री कृष्ण जी ने लीलाओं से अपनी दिव्यता प्रदर्शित किया है। इंद्र के अभिमान को तोड़ने के लिए, कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। क्रोधित इंद्र ने मूसलाधार बारिश की, तब कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर गोकुल वासियों की रक्षा की। यह प्रकृति पूजा और छप्पन भोग का महत्व दर्शाता है, जिसमें भगवान भक्त की रक्षा के लिए कुछ भी कर सकते हैं।कथा के बीच-बीच मधुर गीत संगीत में सभी ने राधे - राधे कहते हुए श्री कृष्ण जी भक्ति में झूमकर अपनी आस्था प्रकट की। शाम होते ही कथा के अंतिम चरण में श्री भागवत भगवान की आरती पूजन कर प्रसादी वितरण कर इसे विराम दिया गया। नगर में हो रहे इस कथापुराण को लेकर भक्तों में विशेष उल्लास है।आने वाले दिनों में भक्तों की भीड़ और बढ़ने की संभावना है। कथा के सप्तम दिवस भगवान का अन्य विवाह, सुदामा चरित्र,8 को यदुकुल को श्राप, परिक्षित मोक्ष, तुलसी वर्षा, शोभायात्रा, 9 को गीता पाठ, यज्ञ -हवन, पूर्णाहुति, कथा विश्राम होगा।
मुकेश कश्यप की रिपोर्ट








